हिन्दू धर्म की आधारशिला ‘वेद’ कहते हैं कि “पशु हमारे मित्र हैं, भोजन नहीं”। यजुर्वेद के सबसे पहले मंत्र का अंतिम शब्द है – “पशून् पाहि” इसका अर्थ है कि पशुओं को मत मारो! वह प्राणी जो हमारी ही तरह हंसते हैं, रोते हैं, हमारे साथ खेलते हैं, हमारी ही तरह सुख और दुःख का अनुभव करते हैं, वे इस दुनिया में मांस, चमड़ा, फ़र, दांत, हड्डी आदि के लिए मारे न जाएं। ये जानवर भी अपना पूरा जीवन जीने का अधिकार रखते हैं।
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